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{मेरी लड़ाई}

नमस्कार मेरे प्यारे दोंस्तो,

!!!!!भोजपुरी प्रती लोगन क सोंच !!!!!

बितल कुछ दिन पहिले दक्षिण भारत के आन्द्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडू, अऊर कर्नाटक के भ्रमण करे के मौका मिलल, अलग-अलग कला अऊर संसकृति से रूबरू भईनी, अदभुत अनुभव रहल जे आप सब के साथ बाँटल चाहतानी ! शुरूआत हमार केरल से भईल, केरल के हमार कुछ मित्र बा जिनके भोजपुरी बोले नईखे आबेला अऊर ना ही ऊ भोजपुरी समझ सकेलन ऊनके हमरो बारे मे नईखे मालुम की हम भोजपुरीयन हई, एक दिन रात के भोजन के बाद टहले खातिर हम बाहर निकल गईनी, वापस आईला पर हम ऊनके देख के शॉक रह गईनी, दृष्य ही कुछ अईसन रहल! “ऊ लोग भोजपुरी के संगीत भोजपुरीया चैनल देखत रहन जा” फिरु हमार सिना चौड़ा हो गईल भोजपुरी खातिर ई दृष्य देखला के बाद! हमरा से ना रहल गईल अऊर हम ऊनकरा से पुछनी ! बात-चीत कुछ अईसन रहल !

 

Me : Guys do u know this language?

One of them: No I don’t know.

Another one: Yea I know its I think Bhojpuri language.

Me : Do you understand it?

Another one: No I don’t understand.

Me : Then why you’re watching this Chanel and enjoying like its your mother tongue?

One of them : Not actually, you know Mr Singh once your start to watch this Chanel you will also like it.

Me : Why so?

One of them : I am telling you frankly, you know what this region makes hot and vulgar videos, & we watch it sometime to enjoy it only. I know you will be surprise on my statement, so before you to tell me something, I am telling you we are also a human being yaar n everyone wants to see such kind of hot scenes….

 

एकरा बाद भी बतीया चलत रहल लेकिन हमार गर्भ से जे सिना चौड़ा भईल रहे छण भर मे सिकुड़ गईल!

लोग भोजपुरू ई खातिर देखलन काहे की भोजपुरी ने हॉट सीन होला !

ई सब वाक्या के बाद भोजपुरी के प्रती लोगों के मन मे का विचार बा जाने के ऊतसुक्ता भईल फिर ई विषय पर हम शोध शुरू कईनी!

जहाँ-जहाँ गईनी, हम जान बुझ के भोजपुरी चैनल देखे लगनी ताकी लोग आपन प्रतिक्रीया वयक्त करे! लगभग हर जगह भोजपुरी के प्रती एक जईसन प्रतिक्रीया मिलल! ई से अंदाजा लगावल जा सकेला की हमार भोजपुरी के अस्तित्व का रह गईल!

बहुत शर्म के बात बा आपन पुरवज के धरोहर के आजु ई हाल मे देख के !

 

एक आवाज़ भोजपुरी संस्कृति को बचाने के लिए

निर्मल “आनंद”

 

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{मेरी लड़ाई}
नमस्कार मेरे प्यारे दोंस्तो,
राऊर सभे के सानने आपन एक सम्बाद रखल चाहतानी, अऊर आप लोग से निहोरो बा की आप सब आपन सोंच जरूर शेयर करी….!!

कुछ दिन पहीले के बात बा, भोजपुरी के कई गीतकार अऊर गायक से हमार भोजपुरी के अस्लीलता पर तर्क भईल, भोजपुरी मे अस्लीलता एक हद पार कर चुकल बा, ना जाने ई सीलसीला कहवाँ जा के रूकी, गीतकार से पुछला पे कि भाई तु फु़हर गाना काहे लिखत बाड़ ? उनकर जबाब सुनके हम शॉक हो गईनी, फिर गायक से पुछनी कि भाई अईसन फुहर गाना काहे गावताड़ ? उनकर जबाब भी वही रहल! “भईआ का करी पब्लिक के डिमांडे येही बा”

हम जानल चाहतानी राऊर सभे से कि का ऊ लोग जे करतारण सही बा? का उनकर कथन सत्य रहल? का हमार भोजपुरी के येहे संसकार ह? का हमार भोजपुरी कला संसकृती मे बस अब येही बच गईल बा? या का ऊ लोग जे कहतारण की पब्लिक के डिमांडे येही बा ई सत्य बा?
अगर ऊ लोग सत्य बारण त हम अफ़सोश के साथ कहतानी भोजपुरी के अस्तित्व अब समाप्प हो गईल! आज के युवा पिढ़ी के अगर यही सोच बा फिर कवँन आपन संसकृति के बचाई?

भोजपुरी सिर्फ एक भाषा नईखे ई हमार संसकृति ह, कृप्या आपन संसकृति के अपने पुरवज के धरोहर के रूप मे बचा के रखी! अभी भी देर नईखे भईल, बंद करल जाव ई सब!

एक आवाज भोजपुरी सभ्यता अऊर संसकृति के बचावे खातीर …..

निर्मल आनंद

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सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्‍न तरह के लोक लुभावन योजना जनता को मूफ़्तखोरी का आदि बनाते जा रही है जो दीमक के तरह आदमी के सघर्ष करने की छमता एवम कार्य छमता को चाट कर खोखला कर रही है|

सरकार द्वारा जो राशि मुफ़त मे लोगो के बीच बट रही है उसका उपयोग यदि स्थाई रूप से रोज़गार सृजन मे की जाए तो सायद बेरोज़गारी की स्मस्या कुछ हद तक दूर हो गयी रहती एवं अलगाववादी ताकते भी सर नही उठा पाती, मेरी जहा तक समझ है की एक प्रखंड मे एक मात्र योजना इंदिरा आवास योजना मे लगभग प्रति वर्ष ४ से ५ करोड़ रुपये का बटवारा मुफ़्त मे किया जाता है|
एक ज़िला मे लगभग २० से २५ प्रखंड होते हैं यदि ज़िला के आवंटन को देखा जाए तो लगभग १२५ करोड़ रुपये सालाना है, यदि इस राशि को किसी उद्योग मे लगाया जाता तो प्रति-वर्ष ज़िला मे एक उद्योग स्थापित होता जिससे हज़ारो परिवार को रोज़गार मिलता रोज़गार प्राप्त परिवार अपने स्वयं से कुछ कर गुजरने का जज़्बा होता यह सब तब ही संभव है जब जनता मे यह संदेश जाए की मुफ़त मे कुछ नही मिलना है कम करना ही प्रगति का मूल मंत्र है|

अंत मे यही कहूँगा की “कर्म ही धर्म है”